
पीठ और कमर दर्द का ऐलोपथी के जरिये इलाज मौजूद है, लेकिन आयुर्वेदिक चिकित्सा में इन दोनों तरह के दर्द का स्थायी उपचार उपलब्ध है। कमर दर्द होने पर दशमूल काढ़ा सुबह व शाम पीना चाहिए। चूंकि कमर दर्द का मूल कारण कब्ज माना गया है, इसलिए कब्ज होने पर अरंडी के तेल का थोड़ी मात्रा में सेवन करना चाहिए। रात में गेहूं के दाने को पानी में भिगोकर सुबह इन्हें खसखस और धनिये के दाने के साथ दूध में मिला लें। सप्ताह में दो बार इसका इस्तेमाल करने से न सिर्फ कमर दर्द ठीक हो जाता है बल्कि शरीर में ताकत भी बढ़ती है। पीठ दर्द खत्म करने के लिए हल्के हाथों से मालिश करवानी चाहिए। इससे कशेरुकाएं यानी रीढ़ का जोड़ सही जगह बैठ जाता है और दर्द से छुटकारा मिलता है। पीठ दर्द से बचने के लिए जरूरी है कि कभी भी झुक कर भार न उठाएं। जब भी कुर्सी पर या चौकड़ी मारकर बैठे तो आगे की तरफ झुककर न बैठें। घंटों तक बैठना हो तो बीच-बीच में हिलते-डुलते रहें। आमतौर पर पीठ दर्द आयु से संबंधी रोग है। उम्र अधिक होने पर अन्य अस्थियों के साथ कशेरूक यानी रीढ़ का जोड़ भी दुर्बल हो जाता है और उनमें कैल्शियम की कमी हो जाती है। 25 प्रतिशत कीबोर्ड ऑपरेटरों को कंप्यूटर पर काम करने से सर्वाइको ब्रैकियल सिंड्रोम हो जाता है। इसमें व्यक्ति की बांह, कंधा, पीठ और गर्दन की पेशियां हमेशा तनाव में रहती हैं। इस दिक्कत से बचने के लिए जरूरी है कि शरीर को नियमित व्यायाम से चुस्त-दुरुस्त रखें। वैसे देखा जाए तो पीठ दर्द के कई कारण है, जैसे सर्जिकल डिलिवरी, गलत तरीके से सोना या उठना-बैठना। महिलाओं को आमतौर पर ऊंची हील की सैंडल पहनने से भी कमर दर्द होने लगता है।